ऐसे माहौल में दवा क्या है, दुआ क्या है?
शायरी एक अहसास है, एक आईना है जो समाज की सच्चाइयों को दिखाता है। जब हालात ऐसे बन जाएं कि दर्द देने वाले ही हमदर्द बनने का ढोंग करें, तो इंसाफ़ की उम्मीद भी बेमानी लगती है।
“ऐसे माहौल में दवा क्या है, दुआ क्या है?
जहाँ क़ातिल ही पूछे के हुआ क्या है?”
यह शेर महज़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि एक सच्चाई है जिसे हर कोई अपने जीवन में कभी न कभी महसूस करता है। जब ज़ुल्म करने वाले ही हमदर्द बनकर सवाल करें, तो उस दर्द की गहराई शब्दों में बयान करना मुश्किल हो जाता है।
जब इंसाफ़ भी सवाल बन जाए…
हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहाँ मासूमियत पर शक किया जाता है और गुनहगार बेगुनाही का मुखौटा पहन लेते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सच को छुपाने वाले ही इंसाफ़ की बातें करने लगें, तो सच का हश्र क्या होगा?
Hinglish:
“Aise maahol mein dawa kya hai, dua kya hai?
Jahaan qatil hi pooche ke hua kya hai?”
Jab zakhm dene waale hi humdard ban jaayein, toh insaaf ki umeed bhi ek sawaal ban jaati hai. Yeh shayari sirf lafz nahi, ek kadwi sachchai hai jo har kisi ki zindagi mein kabhi na kabhi aati hai.
शायरी का असर
शायरी केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि वो अहसास है जो दिल की गहराइयों से निकलता है। यह दर्द की आवाज़ भी है और मोहब्बत की जुबां भी। Taaseer-E-Ishq ऐसे ही दिल को छू लेने वाली शायरियों का एक ख़ास मंच है, जहाँ इश्क़, दर्द और एहसास की हर रंगत बयां होती है।
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